Tuesday, 24 May 2016

How to get attractive personality


ATTRACTIVE  PERSONALITY DEVELOPMENT

आकर्षक व्यक्ति कैसे बनें |

 How to get attractive personality

इस बात को हमें मान लेना चाहिए कि हम चाहते हैं कि लोग हमें पसंद करें । आप किसी के मुँह से यह सुन सकते हैं, ‘मुझे फर्क नहीं पडता कि लोग मुझे पसंद करते हैं या नहीं । लेकिन जब कोई यह कहता है, तो आपको यह समझ लेना चाहिये कि वह झूँठ बोल रहा है । कुछ लोग जन्म से हि लोकप्रिय स्वभाव के होते हैं; प्रत्येक व्यक्ति उन के प्रति आकर्षित Attract हो जाता है । कुछ लोग कभी पसंद नहीं किए जाते ।
अन्य कुछ लोग न तो कभी पसंद किए जाते हैं और न ही कभी नापसंद किए जाते है; वे मात्र उपेक्षित कर दिए जाते हैं । क्यों? निष्पक्ष ईश्वर आकर्षक गुणों के आसमान वितरण वितरण के लिए उत्तरदायी नहीं हैं । प्रत्येक मनुष्य के चरित्र में भिन्न्ताएँ उसकी अपनी उपज हैं । स्वयं उसने ही इन प्रिय या अप्रिय गुणों को अपने इस जीवन में अथवा पिछले जन्मों में उत्पन्न किया है ।
यह बहुत ही बडा अन्याय होता यदि ईश्वर कुछ बच्चों को आरम्भ से ही, अच्छे प्रियकर गुणों की सुविधा और अन्य कुछ बच्चों को बुरे अप्रिय गुणों की असुविधा के साथ भेजने के लिए उत्तरदायी होते । परन्तु ईश्वर ने कुछ बच्चों में बुरी प्रवत्तियों को और दोसरों में अच्छी प्रवत्तियों को स्थापित नहीं किया, अत: हम ईश्वर को उत्तरदायी नहीं ठहरा सकते ।
मनुष्य ने स्वयं ही अपने अच्छे और बुरे गुणों को विकसित किया है । कभी, किसी काल में, इस जन्म में या अन्य जन्म में, उसके अपने कर्मो द्वारा ही ये बीज बो दिए गए थे । यदि वह हानिकाराक और बुरे कर्मो के बिजों को उगने देता है, तो वह जो उसके द्वारा बोए गए अच्छे कर्मो के बिजों को उगने नहीं देंगे । जो बुध्दिमान हैं वे अपने जीवन की बगिया से बुरे कर्म के बिजों को निकाल फेंकते हैं ।
अगर आप जान-बूझकर लोकप्रियता का पिछा करेंगे तो इस बात की संभावना प्रबल है कि आप इसे हासिल नहीं कर पायेंगे । परन्तु उस तरह के दूर्लभ व्यक्ति बन जाये जिनके बारे मे लोग कहते हैं; ‘उसमें निश्चित रुप से कुछ बात तो है’ और आप विश्वास कर सकते हैं कि लोग आपको पसंद करने लगे हैं और आप सही राह पर जा रहे हैं । यह एक बात और जान ले कि लोकप्रियता की आपकी योग्यताओं के बावजुद हर कोई आपको पसंद नहीं करेगा । मानवीय स्वभाव में एक अजीब सा पेंचा है, जिसके द्वारा कुछ लोग बस युँ ही आपको पसंद नहीं करेंगे ।
आकर्षकता भीतर से आती है |
व्यक्ति को स्वयं अपना एवं दूसरों का विष्लेषण करना सीखना चाहिए जिससे पता चल सके कि क्यों कुछ लोग सभी के द्वारा पसंद किये जाते है, और कुछ लोग नहीं । यहाँ तक की बच्चो में भी हम पाते हैं कि कुछ को तो सभी प्यार करते है और कुछ की उपेक्षा ।
इस प्रकार के विश्लेषण सबसे पहली बात जिसका पता चलता है वह यह है कि यदी कोई लोकप्रिय बनना चाहता है तो उसे स्वयं अंदर से और अधिक आकर्षक बनाना चाहिए । कभी-कभी शारीरिक रुप से अत्यधिक आकर्षक व्यक्ति भी विकर्षक हो सकता है, क्योंकि उसकी वाणी और क्रियाकलापों से उसके अंदर की कुरुपता झलकती है ।
अधिकांशत: आप अपने आचरण से परखे जाते हैं |
व्यक्ति कुछ हद तक अपने पहनावे से पहचाना जाता है, पर अधिकांशत: वह अपने आचरण से पहचाना जाता है । सदा साफ-सुथरे और सिव्यवस्थित दिखें । अधिक सज्जित न हों: भडकीले कपडे और ऊपरी सजावट से सजा व्यक्ति को अजायबघर के नमुने सा बना देता है । सादे और साफ सुथरे कपडे पहने, जो आपके व्यक्तित्व के अनुरुप हों । परन्तु सर्वप्रथम अच्छा व्यवहार करना सीखें । एक बार जब आप मांसिक रुप से विकसित हो जाते है और आकर्षक आंतरिक गुणों का स्रजन कर लेते हैं तो पहनावे का महत्व कम हो जाता है।
अभिप्राय यह है कि मनुष्य को हर समय शरीर के विषय में ही नहीं सोचते रहना चाहिए; और न ही उसे ईसके प्रति असावधान होना चाहिए । शरीर के प्रति आवश्यकता से कम अथवा अधिक ध्यान देने से व्यक्ति असंतुलित और सनकी बन जाता है ।
जब दूसरों के साथ हों, तो सच्चे और विचारशील रहें ।
जब आप दूसरों के साथ हो ते हैं; तो स्च्चे दिल दे उनके प्रति स्नेही रहें । चिड-चिडे न बनें । आपको लकडबग्घे कि तरह जोर-जोर से हँसने की जरुरत नहीं, परन्तु मुँह लटकाए भी न रखें । बस मुस्कराते रहिए, दूसरों के प्रति सौहादपूर्ण और स्नेह पूर्ण रहिए । परन्तु बाहर से मुस्करातें रहना, जबकि आप अंदर ही अंदर गुस्से में हों या कुढ रहें हों, मिथ्याचार है । यदि आप लोकप्रिय होना चाहते है तो सच्चे बनें । शांत रहें और उनका ध्यान रखें । लोकप्रिय चुम्बकत्व को विकसित करने का यही एक तरीका है ।
दूसरों के लिए जिएँ और वे आपके लिए जिएँगे ।
यदि कोई आपकी जगह पर बैठना चाहता है, तो उसे बैठने दें, भले ही आपको खडा रहना पडे । आपके इस आदर्श व्यवहार के कारण प्रतिदिन आपको कोई न कोई ऐसा व्यक्ति मिलेगा जो आपके लिए विचारपूर्वक सोचेगा । जब आप दूसरों के लिए जीना सिख लेते हैं, तो किसी को आपमें दिलचस्पी नहीं होती । अपने सद्व्यवहार से आप दूसरों को बहुत अच्छी तरह से आकर्षित कर सकते हैं ।
अपनी वाणी तथा अपने कर्मो में शिष्टता लाने का अभ्यास करें, और जब खरी-खोटी सुनाने का मन हो तो उस आवेश पर नियंत्रण करें; और कटुता की बजाय शान्ती से बात करें । कोई भी आपके मुँह से कडवे शब्द सुन न पाए । जब आपसे कुछ पूछा जाए तो सत्य बोलने से डरें नहीं; परन्तु अपने विचारों को दूसरों पर न थोपें ।
जब आप किसी कपडे की दूकान पर जातें हैं, तो आप वह वस्त्र लेने का प्रयास करते हैं जो आपके अनुकूल हो और जो आपके व्यक्तित्व को निखारता हो । आपको अपनी आत्मा के लिए भी ऐसा लिए भी ऐसा ही करना चाहिए । आत्मा की कोई विशेष पोशाक नहीं होती; यह जो वेश चाहती है वही धारणा कर सकती है । शरीर की सिमाएँ हैं, किन्तु आत्मा किसी भी प्रकार की मानसिक पोशाक, किसी भी प्रकार के व्यक्तित्व को धारण कर सकती है ।
जैसे आप आशा करते कि दूसरे बनें, पहले आप वैसे स्वयं बनें । इन सुझावों का अभ्यास करें । एक समय में एक ही गुण को विकसित करने का प्रयास करें । उदाहरण के लिए, आज से शान्ति का अभ्यास करें । उसके बाद प्रसन्नचित रहने का प्रयास करें चाहे आप दू;खी हों, तो भी मुस्कराने का प्रयास करें ।
दूसरों का ध्यान रखने का और उनके प्रति अच्छाई करने का प्रयास तब तक करते रहें, जब तक आप एक ऐसे सुन्दर फूल के समान नहीं बन जाते जिसे हर कोई देखना चाहता है । फूल की सून्दरता और निर्मल मन की आकर्षकता को आत्मसात करें । जब आप इस तरह आकर्षक होगें, तो आप सदा ही सच्चे मित्र पाएँगे । आप मनुष्य और ईश्वर, दोनों के ही प्रेमपात्र बन जाएँगे
तो कुछ बातें जो आपमे होनी चाहिए जिससे आप दूसरों के चहते बन सके|
-जैसे -कभी झूठ नहीं बोलना |
-बड़ों का आदर करना |
-किसी की हेल्प करना |
-दूसरों के बारे में भी अच्छा सोचना|
-हमेशा हंसमुख रहना |
-हमेशा सत्य बोलने वालों का support करना चाहिए कभी भी झूठे व्यक्ति  का साथ नहीं देना चाहिए
- हमेशा सत्य बोलना चाहिए |
- हमेशा अच्छे दोस्तों के साथ रहना चाहिए
- अपनी संगति अच्छी होनी चाहिए |

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