Tuesday, 24 May 2016

Narender modi biography

Narender modi biography

"मैं नरेंद्र दामोदर दास मोदी ईश्वर की शपथ लेता हु के..." यह शब्द सव्वासों करोड़ भारत वसियों के लिया नयी आशा की किरण लेके आए.

"माना की अँधेरा घना है. लेकिन दिया जलना कहाँ मना है". श्री नरेंद्र मोदी द्वारा लिखे गए यह शब्द साधारण लेकिन काफी उम्मीद भरें है. १७ सितम्बर १९५० की मेहसाना जिले के वडनगर गाँव में उनका का जन्म हुआ. माँ का नाम हीराबेन और पिता का नाम दमोरदास.


उस वक्त उनके पिता का रेल्वे स्टेशन पर चाय बेचने का स्टॉल था. नरेंद्र सात साल की उम्र से ही पिताजी साथ काम करते थे. दोपहर स्कुल की छुट्टी में भी वे स्टॉल पे काम करने जाते थे. पिताजी चाय बनाते और नरेंद्र केटली लेकर प्लेटफॉर्म पे चाय बेचते. स्कुल में खेल, नाटक, सोशल वर्क सभी गतिविधियों में हिस्सा लेते थे. उन्हें पढ़ने का काफी शौक था. घंटो तक लायब्रेरी में स्वामी विवेकानंदजी की और दूसरी किताबें पढ़ते थे. सिर्फ आठ साल की उम्र से ही वो राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ के शाखा में जाने लगे. आरएसएस के विचारोंसे वे काफी प्रभावित हो रहे थे. और जीवनभर सिर्फ आरएसएस के लिए प्रचारक का काम करना है! यह निश्चय कर रहे थे, इस फैसले से उनके माता पिता काफी परेशान हो गए और कही वो सन्यास ना लेले इस डर में माता-पिता ने १३ वर्ष की उम्र में उनकी सगाई जशोदाबेन से करवा दी. आगे मोदी जब १८ साल के हो गये तब उनके माता पिता ने जशोदाबेन को घर लेके आये. लेकिन नरेंद्र इस शादी से कभी खुश नहीं थे. और सिर्फ ३ महीने एक साथ रहने के बाद नरेंद्र अपना घर छोड़ दिया और वो आध्यात्मिक की शिक्षा लेने के लिए हिमालय चले गए.


और ३ साल बाद जब नरेंद्र वापिस घर आए तो माता पिता को फिर से उनके घर छोड़के जाने का डर सताने लगा और वो नरेंद्र पर जशोदाबेन को वापिस घर लेन के लिए दबाव देने लगे. लेकिन वो किसी भी हाल में संघ का प्रचारक होना ही था इसी लिए उन्होंने वापिस घर छोड़ दिया और अहमदाबाद आ गए.


संघ के मुख्यालय में झाड़ू मारने से खाना बनाने तक सभी काम करने लगे. धीरे धीरे संघ मुख्यालय का पूरा काम खुद करना शुरू किया. उनके इस काम से वरिष्ठ नेता काफी खुश थे.


१९८१ में संघ ने नरेंद्र मोदी को गुजरात का प्रभार दे दिया. वे राजनीती से हमशा दूर ही रहना चाहते थे. लेकिन उनकी काबिलियत देखके १९८७ में उनको बीजेपी में काम करने के लिए आमंत्रित किया गया. और संघ के साथ बीजेपी के भी प्रचारक पद पर काम करने लगे. १९९० में लालकृष्ण आडवाणी ने गुजरात से आयोध्या तक की रथ यात्रा शुरू की और इस रथ यात्रा के आयोजन का पूरा काम मोदी ने किया, पूरी यात्रा में वो आडवाणी के साथ रहे और आडवाणी के करीब आ गये.
उसके बाद मुरली मनोहर जोशी जो बीजेपी के अध्यक्ष थे उन्होंने कन्या कुमारी से श्रीनगर तक एकता यात्रा शुरू की. और वहां भी पूरी यात्रा की जिम्मेदारी लेते हुए अंतः तक वो मुरली मनोहर जोशी के साथ रहे. अब मोदी का पार्टी में कद बढ़ रहा था और बीजेपी में वो गद्दावर नेता के तौर उभरने लगे.


१९९५ में गुजरात विधान सभा की भी जिम्मेदारी मोदी ने लेली और पूरा जोर लगा के बीजेपी को १२१ सीटों पर जीत दिल दी. और उन्हें बीजेपी के राष्ट्रिय सचिव पद की जिम्मेदारी दे दी गयी.
आगे २००१ में वाजपेयी ने मोदी को चुनाव में खड़ा होने बात कही. लेकिन उन्हें चुनाव लढने में दिलचस्पी नहीं थी. वो बस संघटन बढ़ने में विश्वास रखते थे. लेकिन उनको मुख्यमंत्री पद के लिए दावेदार कर दिया और उन्हें चुनाव लढना पड़ा. और यक़ीनन वो चुनाव जीत गए और अक्टूबर २००१ को मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बन गए. लेकिन यह ख़ुशी सिर्फ ३ महीने तक रही. गोधरा की घटना घटी और और इसका असर पुरे गुजरात पर हुआ. विरोधी पार्टिया उन्हें इस घटना से जोड़कर बैक फुट पर डालने की कोशी करने लगी, वो मिडिया के भी निशाने पर आ गए. लेकिन इस पुरे मामले को मोदी ने काफी शांति से सम्भाला
कुछ ही दिनो मे चुनाव होने वाले थे विरोधी ने जमकर विरोध किया लेकिन जनता के मन में उनके प्रति की अच्छी छबि थी और मोदी को फिरसे जबरदस्त जीत मिल गयी और अब उनके खिलाफ बोलने वालोंकी बोलती बंद हो गयी थी. वो अब जो भी फेसला लेंगे उसे कोई विरोध करने वाला नहीं था. और जोरो शोरो से उन्होंने गुजरात का विकास शुरू किया. टाटा की नैनो बंगाल से गुजरात में आगयी और मोदी के विकास की रफ़्तार को देखके पूरा देश उनके तरफ एक अच्छे नेता के रूप में देखने लगा. जो उनसे अच्छे भविष्य की उम्मीद कर सकते थे.


अब साधारण जनता से लेके बड़े बड़े बिजनेसमैन उन्हेही अगला प्रधानमंत्री बोल रहे थे. जनता का फैसला पार्टी के बड़े नेता भी समझ गए और बीजेपी ने भी मोदी को प्रधानमंत्री पद दावेदार बताया.
२०१२ में पिछले ६० सालोमें जो चुनाव दुनिया ने नहीं देखा था वो हो गया. गुजरात, राजस्थान जैसे राज्यों में बीजेपी के सभी उम्मीदवार जीत गए और उन सव्वसों करोड़ लोगोंका सपना तब हकीकत बनता दिखा जब पंतप्रधान के तौर पर उन्होंने शपथ ली "मैं नरेंद्र दामोदर दास मोदी ईश्वर की शपथ लेता हु के"......


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