Friday, 10 June 2016

जहाँ चाह वहाँ राह, Power of positive thinking

जहाँ चाह वहाँ राह, Power of positive thinking
जहां चाह वहां राह , जीवन की सारी उपब्धियों का स्त्रोत एक चाह ही होती है। जिसका कामना अथवा इच्छा को आप दिन-रात अपने संग रखेंगे उससे अनुप्राणित रहेंगे वह धीरे-धीरे आपके व्यक्तित्व का अंग बन जायेंगी। चाह में बडी आकर्षण शक्ति ‘attraction power’ होती है। जब चाह चरम सीमा पर पहूंच जाती है तो इस आकर्षण ‘attraction’ के छोर से बंधी हुई प्रत्येक वस्तु आपकी और खिंची चली आती है अनमने होकर काम करने से दाल-रोटी तो चल सकती है परन्तु समृद्धि प्राप्त नहीं की जा सकती ।
युवकों को केवल एक ही मूल मंत्र देना चाहता हूं अपने आप पर विष्वास रखो, अपनी शक्तियों पर भरोसा रखो। यह बात स्मरण रखों कि तुम्हारें भीतर वह शक्ति है जो एक बार जागृत होने पर तुम्हें न केवल इमानदार उद्यमी वरण सफल व सुसस्क्रत भी बना देगी।
खुद से बतियाएँ – TALK TO YOURSELF
आपके चारों ओंर आनन्द और मनोरंजन के अनेक साधन विद्यमान है। बुद्धिमान व्यक्ति प्रत्येक वस्तु और प्रत्येक स्थान पर आनन्द खोज लेते है। आप प्रातः काल सो कर उठे तो उस समय कसकर दृढ निष्चय करें कि चाहे कुछ भी हो आज के दिन को आनन्द और उल्लास का दिन बनाकर ही रहेंगें। इसका परिणाम यह होगा कि संभावित असफलता और संकट आपके पास नहीं आयेंगे।
आपका दिन व्यर्थ नष्ट नहीं होगा। आप जितना काम कर पाते उससे दो गुना काम आवष्य कर डालेंगे। यदि मन खिन्न हो जाये तो प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए खुब हँसें और मुस्करायें। जोर-जोर से खिलखिला कर हंसने का प्रयत्न किजिए।
कष्टों की सदा अपेक्षा कीजिए। उनका मजाक उडाईयें, जब हम उनकी अपेक्षा करते हैं उन्हें भूला देते हैं तब वह विचार हमारे लिए दुखदायी नहीं रहते। विपत्तियों में अपने मन को सुधारकर उनका मुकाबला करने के षक्ति पैदा करना एक उत्तम गुण है।
अतः अपने मन को वष में रखने की शक्ति प्राप्त कीजिए ताकि हीन चित्तवृत्तियाँ आपको न डिगा सके। कितनी भी कठिनाईंया हो अपने विचारों पर दृढ रहिए। आपकी विजय पताका फहरायेगी और आप अपने उद्देष्य में सफल होंगे। मनुष्य जिस बात का चिंतन और मनन करता है और जिन उद्देष्यों की पूर्ति का संकल्प करता है, उनमें उसे मानसिक निष्चय द्वारा ही सफलता प्राप्त होती है।
संकल्प का ही दूसरा नाम सफलता है, और व्यक्ति का मन संकल्पों का
स्त्रोत है। अतः मन में किसी प्रकार की कमजोरी न आने दें। उसमें जंग न लगने दे। यदि मन प्रफुल्लित रहेगा तो निर्बल शरीर भी कठिन से कठिन कार्य करने में समर्थ हो सकता है।
अर्थार्थ यदि हम मन में कोई संकल्प करते हैं| तो हमें सफलता मिलती है इसीलिए यदि कोई संकल्प लेते हो या अपने आप से वादा करते हो वह दृढ़ता से पूर्ण करना चाहिए|
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धन्यवाद दोस्तों

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